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में आजाद कैसे हो सकता (सकती)हु ?


आज़ाद रहने के लिए आपको तय करना चाइए की आपके जीवन मे अधिक महत्व किसका है।
आज़ादी का ,या बंधन का?
मगर आज़ाद होने पर हम खोया हुआ महसूस करते है
आप पहाड़ो पर जाए मतलब पूरी तरह से आप आज़ाद हो कोई भी ,कुछ भी आस पास न हो आप बस पहाड़ो के खाली इलाके में हो तो आप आज़ाद नही महसूस करते आप खोया हुआ महसूस करते है।
आज़ादी को समहालने के लिए एक स्तर की स्पष्टता और शक्ति की जरूरत होती है।
ज्यादातर लोग आज़ादी को नही समहाल सकते।
वो हमेशा खुद को बाधने की कोशिश करते है, मगर हर समय आज़ादी की बातें करते रहते है।अगर आप उन्हें वाकई आज़ाद कर दे तो उन्हें बहुत दुख मिलेगा।,
इस तरह से इंसान फिलहाल पिंजरे के पक्षी को तरह है
अगर आप किसी चिड़या को लंबे समय तक पिंजरे में रखे और पिंजरे का दरबाजा खोल दे तो तब भी वह चिड़िया नही उड़ेगी।
अंदर होने पर वह विरोध करेगी कि वो आज़ाद नही है मगर वह उड़ेगी नही। 
इंसान की स्थिति भी ऐसे ही है।
बाकी सभी प्राणियों के लिए प्रकति ने दो लकीरे खींची है
जिसके भीतर उन्हें जीना और मरना होता है और वे यही करते है।
सिर्फ इंसानों के लिए नीचे की लकीर होती है, ऊपर की लकीर नही होती और उन्हें इसी बात की तकलीफ है 
अगर उनका जीवन भी हर दूसरे प्राणी की तरह तय होता
तो वे दुखी नही होते, बेचेंन न होते अपनी ही बुद्धि को समहालने के लिए परेशान न होते।
और अनजाने में आप यही खोज रहे है, आप उसे सम्बंधोके रूप में खो सकते है,पेशे के रूप में खोज सकते है या खोज सकते है जात, समुदाय,भगवान,स्वर्गया नर्क के रूप में आप बस एक नकली लकीर खींचने की कोशिश कर रहे है जिसका अस्तित्व नही है क्योकि आज़ादी के लिए साहस की जरूरत होती है, एक तरह के पागलपन की जरूरत होती है।
अगर आप बहुत समझदार है तो आप आज़ाद नही हो सकते क्योंकि आप तर्क की दो लकीरों के बीच चलेंगे आज़ाद होने के लिए बहुत ताकत चाहिए।
क्या आप जानते है हर इंसान के अनुभव का एक रासायनिक आधार होता है जिसे आप खुशी कहते है वो एक तरह की केमिस्ट्री है, दुख दूसरी तरह की केमिस्ट्री है।
तनाव एक तरह की केमिस्ट्री है बेचैनी एक तरह की केमिस्ट्री है, पीड़ा एक तरह की कैमिस्ट्री है परमानन्द एक तरह की तो आपके जीवन के अनुभव का एक रासायनिक आधार है
आपके अपने मेकइज्म को ध्यान से नही देखा है यह किस तरह काम करता है
अभी मान लीजिए कि आप बिलकुल आनंद में है तो क्या आपको परवाह होगी कि यहाँ कोन है कोन नही है, अगर वह आस पास है तो बढ़िया और चले गए है तो और भी बढ़िया।
क्योंकि जीवन का आपका अनुभव इससे तय नही हो रहा की आपके पास क्या है और क्या नही है चाहे वो लोग हो , या भोजन हो या चीज़ हो या कुछ और हो
उनसे तय नही हो रहा।
एक  जब आपके होने का तरीका किसी बाहरी चीज़ से तय नही होता तो अकेलापन जैसी कोई चीज़ नही होती
बल्कि आप अपने अकेलेपन का आनंद लेंगे क्योंकि आप चाहे या न चाहे इस छोटी उम्र में ये समझना थोड़ा मुश्किल है
हम चाहे या न चाहे इस शरीर के अंदर हमेशा अकेले रहते है। चाहे आप संवाद करे या संभोग या और कुछ फिर भी आप शरीर में अकेले ही है, अगर आप इस अकेलेपन को समहालना नही सीखते, तो आपने इस जीवन के बारे में कुछ नही सीखा।
जीवनके बारे में सबसे खूबसूरत चीज़ यह है कि यहा कोई नही आ सकता ये सिर्फ मेरी जगह है।
हा या न
क्या ये सबसे खूबसूरत चीज़ नही है, कोई मेरे अंदर नही घुस सकता, वो मुझे कैद कर सकते है टॉर्चर कर सकते है कुछ भी कर सकते है पर मेरे अंदर नही घुस सकते।
क्योंकि मेरे पास एक जगह है जो सिर्फ मेरी है , क्या ये आपके जीवन का सबसे सुंदर पहलू नही है।
इसे तकलीफ न समझिए ये सबसे सुंदर चीज़ है जीवन एक खेल है क्योंकि वह खत्म हो जाता है।
मगर महत्वपूर्ण चीज़ यह है कि आप अपने भीतर कैसे है
अगर आप इस तरह से यहाँ है कि आप अपनी जरूरतों के अनुसार चलते हो तो आप बहुत ही तुच्छ जीवन जिएंगे।
लेकिन आप बिना किसी जरूरत के कही बैठ सकते है, ।मगर जो जरूरी है वो करेंगे तो आप एक शानदार जीवन जिएंगे 'अपने लिए इसे सच बनाये'

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