शायद इन सब की जरूरत हो। पर किस अनुपात में जब आप भाग्य का नाम लेते है तो निश्चित रूप से ये आपके वश में नही है।जब आप किस्मत की बात करते है तो भी आप कुछ नही कर सकते।जब आप ईश्वर की बात करते है तो उसके बारे में भी आप कुछ नही कर सकते बस आपके हाथों में प्रयत्न ही रह जाता है तो अपना 100% प्रयत्न पर ही लगा दीजिये। जो होगा वो होगा।
अपनी ऊर्जा के कुछ हिस्सों को भाग्य, ईश्वर , आस्था के नाम न छोड़िए अगर ऐसी कोई चीज़ है तो काम करेगी आपके हाथ में सिर्फ प्रयत्न है। बस उसे ही करे
आपका प्रयत्न प्रभावशाली होना चाहिए, वो केंद्रित ओर नपा तुला होना चाहिये।
बस यूही प्रयास करते रहना मूर्खता है। सिर्फ मेहनत करने से आपको कुछ हासिल नही होने वाला, सही काम ,सही समय, सही स्थान ये सभी एहमियत रखते है।
इन सभी के होने के लिए आपको बोध ओर समझधारी चाइए
आपको अपने जीवन मे इतना ही करना है बोध और बुद्धिमता में निखार लाने के साधन तलाशते रहना है।
बाकी सब तो वैसे भी हो जी जाएगा।यही एक चीज़ है जिसकी ओर मानवता ध्यान नही दे रही , वे कोई न कोई क्षमता पाने की कोशिस कर रहे है। आप कोई क्षमता पाने की कोशिस न करे, बस अपने बोध ओर बुद्धिमता को बढ़ाये फिर जीवन मे जिससे भी सामना हो।
अभी मान लीजिए दुनिया मे ये हमेशा होता रहता है।
हर कोई "डॉक्टर" बनना चाहता है आज कल नही लेकिन बीस-पच्चीस साल पहले ऐसा हुआ करता था पढ़ाई मतलब "डॉक्टर"अगर इसके लिए सीट न मिले तो इसके बाद क्या "इंजीनियरिंग" सीट न मिले तो क्या अगली चीज़ फिर अगली चीज़ दुनिया मे ऐसे बहुत कम लोग है जो सिर्फ "डॉक्टर" बनने के लिए "डॉक्टर" बनना चाहते है बाकी लोग सिर्फ पैसा कमाने के लिए डॉक्टर बनते है।
कुछ लोग सही मायने में डॉक्टर बनना चाहते है। वे मनुष्य के तंत्र को समझ कर सही मायने में सेवा करना चाहते है।
सफल होने की कोई तय रेसिपी नही होती। 'सफलता' वही है जब आप अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर पाते है।
इससे कोई फर्क नही पड़ता कि आप डॉक्टर बनते है या नेता , या योगी , या कोई और......
'सफलता' का अर्थ है आप जीवन को पूरी क्षमता के साथ जी रहे है वही सफलता है।
यदि ऐसा होना है तो आपको बोध के साथ एक सक्रिय बुद्धि की जरूरत होगी।
में अपनी बुद्धि कैसे बढ़ाऊ इस बारे में चिंता न करे।
इस समय अपने बोध में निखार लाना जरूरी है।
अगर आप जीवन को जैसा वो, है वैसा ही देख पाते है तो आपके पास इसे ठीक से चलाने योग्य बुद्धि होगी,
'अगर आप जीवन को उसके असली रूप में नही देख सकते तो आपकी बुद्धि आपके खिलाफ चलेगी।'
इस ग्रह के अधिकतर अक्लमंद लोग आमतौर पर दुनिया के सबसे ज्यादा दुखी लोगों ने से रहे है। "ऐसा इसलिए है उनके पास सक्रिय बुद्धि तो है पर वह जीवन को ठीक से देख नही पाते"
तो एक अहम बात जिस पर लोगो ने काम नही किया वो है अपने बोध में निखार लाना। वो अपने मन का विस्तार करने की कोशिश कर रहे है ये इतना एहमियत नही रखता वो आपको केवल सामाजिक रूप से सफल बनाएगा सही मायनों में सफल नही।
" अगर आप सही मायनों में सफल होना चाहते हो
तो आपको चीज़ों को उसी रूप में देखना होगा जैसी वो है"
अगर आप हर चीज़ को उसके असली रूप में देखना सीख गए तो जीवन एक खेल बन जायेगा। आप इसे पूरे आनंद के साथ अच्छे से खेल सकेंगे ।
अगर आप इसे अच्छी तरह खेल सके तो लोग आपको सफल जानेंगे
आपको ये कभी नही सोचना चाहिए कि में सफल होना चाहता हु। बस इतना सोचिए कि खुद को आप एक पूर्ण विकसित इंसान बना सकते है।
आप सफल होने की चिंता न करे ये जीने का सही तरीका नही है।आप बस दुख और दर्द पैदा कर लेंगे खुद के लिए बाकी सभी के लिए भी क्योंकि आपके लिए 'सफलता' का अर्थ है किसी ओर के सिर पर सवार होना।
"आपके लिए 'सफलता' यानी सब आपसे नीचे हो
ओर आप सबसे ऊपर"
आपके लिये यही 'सफलता' है , ये 'सफलता' नही है ये बीमारी है 'सफलता' के बारे में कभी न सोचें बस ये देखे की खुद को कैसे एक संपूर्ण इंसान बनाया जाए।
लोग आपकी 'सफलता' को पहचाने आपको ये नही सोचना चाहिए कि में कैसे सफल हु।
ये जीवन जीने का गलत तरीका है।

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